जब सपनों ने पंख लगाए – मजदूर परिवारों के बच्चों ने इतिहास रच दिया!

Nilesh Dahariya

"जब सपनों ने पंख लगाए – मजदूर परिवारों के बच्चों ने इतिहास रच दिया!"

क्या पढ़ाई सिर्फ अमीरों के लिए है? क्या सपने सिर्फ उन्हीं के पूरे होते हैं जिनके पास साधन हैं?

छत्तीसगढ़ के 28 होनहार छात्रों ने इन सवालों का जवाब अपने शानदार बोर्ड परीक्षा परिणाम से दे दिया – एक ऐसा जवाब जिसने पूरे प्रदेश का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया!


टीन की छत, मिट्टी की दीवारें और किताबों की दुनिया में उड़ान...

इन बच्चों के पास शायद AC रूम नहीं था, शायद इंटरनेट की स्पीड कम थी, लेकिन हौसले 5G से भी तेज थे।
इनके माता-पिता दिन-रात मेहनत करते हैं – कोई ईंट ढोता है, कोई खेत में मजदूरी करता है, कोई सब्जी बेचता है। लेकिन इन बच्चों ने साबित कर दिया कि "हालात नहीं, इरादे इंसान को आगे बढ़ाते हैं।"

छात्र नहीं, ये असली हीरो हैं!

इन 28 छात्रों में कोई रायगढ़ की कृतिका यादव है, तो कोई बेमेतरा की ऋतु साहू, रायपुर की लुभी साहू, बलरामपुर के बिरेंद्र कुर्रे, सूरजपुर की भूमिका राजवाड़े, और लोरी गांव के संदेश कारंगा – ये सब आज एक मिसाल हैं।

सरकार ने भी माना – मिलेगा 2 लाख का पुरस्कार

छात्रों को मिलेगा ₹2 लाख का इनाम और राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सम्मान।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और श्रम मंत्री लक्ष्मण देवांगन खुद इन बच्चों की तारीफ कर चुके हैं।

अब आपकी बारी है!

  • स्मार्टफोन कम है? – चलो किताब से दोस्ती करें!
  • टाइम नहीं मिलता? – सोशल मीडिया छोड़ो, सपनों को पकड़ो!
  • सपोर्ट नहीं है? – खुद अपना सपोर्ट बनो!

पढ़ाई एक रास्ता है खुद को बदलने का, परिवार को ऊपर उठाने का, और देश के लिए कुछ करने का।

चलो आज एक वादा करें:

"मैं मेहनत करूंगा, सीखूंगा, और एक दिन ऐसा मुकाम बनाऊंगा कि दुनिया सलाम करे!"

अगर यह कहानी आपके दिल को छू गई, तो इसे शेयर करें – और किसी को पढ़ाई के लिए प्रेरित करें!

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छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षा टॉपर बच्चों को मिला 2 लाख का पुरस्कार

छत्तीसगढ़ राज्य में शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से श्रम विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। यदि किसी पंजीकृत निर्माण श्रमिक के बच्चे बोर्ड परीक्षा (10वीं या 12वीं) में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं और मेरिट सूची में आते हैं, तो उन्हें ₹2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। यह योजना न केवल विद्यार्थियों को प्रेरित करती है बल्कि उनके परिवारों को भी आर्थिक रूप से सहयोग करती है।

योजना का उद्देश्य

इस योजना का मुख्य उद्देश्य है कि श्रमिक वर्ग के बच्चे भी पढ़ाई में पीछे न रहें और उन्हें समान अवसर मिले। आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में राज्य सरकार की यह योजना उन्हें न केवल पुरस्कार देती है, बल्कि उनके भविष्य के लिए आशा की एक किरण बनती है।

कौन कर सकता है आवेदन?

  • जिस छात्र/छात्रा के माता या पिता श्रम विभाग में पंजीकृत निर्माण श्रमिक हों।
  • छात्र ने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल से 10वीं या 12वीं परीक्षा उत्तीर्ण की हो।
  • वह छात्र राज्य स्तरीय मेरिट सूची में शामिल हुआ हो।

पुरस्कार वितरण समारोह की झलक

हाल ही में राजधानी रायपुर में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने टॉपर बच्चों को 2 लाख की प्रोत्साहन राशि और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर श्रम मंत्री, शिक्षा विभाग के अधिकारीगण और बच्चों के अभिभावक भी उपस्थित थे।

Meritorious Students Chhattisgarh

अखबार की रिपोर्ट के अनुसार...

अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इस बार कुल 5 बच्चों को यह सम्मान मिला है। ये सभी छात्र-छात्राएं जिले के अलग-अलग विद्यालयों से हैं और इन्होंने 90% से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। सभी विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर तबके से आते हैं, परंतु उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया है।

आप क्या कर सकते हैं?

यदि आप या आपके जान-पहचान में कोई श्रमिक है, जिसके बच्चे पढ़ाई में अच्छे हैं, तो उन्हें इस योजना के बारे में जरूर बताएं। यह प्रोत्साहन उनके भविष्य को दिशा दे सकता है।

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